"Embrace Eco-Friendly Tradition Celebrate Rakhi with Cow Dung Rakhis" And make a special bond with your siblings and all your loves that never breaks As we all know that Raksha Bandhan, is a beautiful festival, in which we celebrate the special bond between siblings. The sister ties a protective thread (Rakhi) around her brother's wrist, symbolizing her love and care for him. In return, the brother pledges to protect and support his sister throughout her life. Celebrate the Rakhi festival without harming the planet and make awareness about environmental sustainability, prompting individuals to explore innovative ways. One such innovative approach is the use of eco-friendly cow dung Rakhis. These Rakhis not only honor tradition but also promote sustainability and the welfare of the environment. Embracing Cow dung Rakhi a natural and renewable resource. Cow dung Rakhis are handmade, biodegradable, and free from harmful chemicals. These Rakhis are not only environ...
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एहसास का टुकड़ा
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आंखो मे उसकी एक पुराना कहर देखा दर्द मे लिपटे मंजर का टूटा एहसास दिखे तो बस आंसू , जख्म ही नहीं दिखे वो अवसाद की बीमारी से लड़ती रही जब हादसों ने उसको उखाड़ दिया था दूसरों की व्याख्या से जीकर देखा तो एहसास ही मरने लगा था औरों को उसमे भी वहम नज़र आया एहसास तरह तरह का होने लगा था ख्याल जब अपनों पर जा टिका फिर एक नया एहसास जुड़ गया पता चल कि – वो तो अब दवाइयों पर जी रही थी जिसने दर्द का एहसास छीन लिया दर्द भरा एहसास उसको अपने गर्भ तक ले गया उसको तो सब रिश्ते चाहिए थे , पर किसी को वो नहीं चाहिए थी आलीशान बंगला भी उसको समेट न पाया दर्द भरे एहसासों ने उसे खंडहर बना डाला वह वृद्ध आश्रम मे नया एहसास ढूँढने लगी कंवख्त जिंदगी से हारे कुछ लोग उसकी धंधली सोच मे भटकने लगे थे मगर घात लगाने आ जाते थे झूठी कल्पनाओं से बुनी हुई कहानी सुनती रही वो अपनी ही जुबानी न कोई अपना , न साथी न संबंधी अब जिंदा ...
जीवन एक संघर्ष
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थका थका सा क्यूँ है मन अब जीवन के संघर्षों से हताशा दिखती चेहरे पे क्यूँ आश नहीं है जीने की अंधकार के साये से क्यूँ पल पल डरता है मन आश छोड़ दी जीने की क्यूँ रास नहीं आता कोई आश लगे न जीने की जब ध्यान लगा लेना नभ पे कैसे नभ मे उड़ते पंछी मन को हर्षाते हैं नहीं है मानव जीव है लेकिन बहुत हमें सिखला जाते मूक हैं कोई शोर न करते प्रतिक्रिया बहुत कुछ कह जाती नन्हें - नन्हें पंखों से कैसे हवा में उड़ते जाते दिन भर दानों की खोज में रहते कभी नहीं घबराते हैं कभी जो मौसम सख्त हुआ या गरम हवा का झोका हो तो पेड़ की छइयाँ मे रुककर क्या धैर्य दिखाते हैं तिनके मुँह में चुन चुन कर एक गुजर बसर बनाते हैं कभी कड़कती बिजली से या कभी कडक इंसानों से अक्सर उनके अरमानों के घोसले टूट जाते हैं , रोज़ की असफलता और जीवन की कुरूर सत्यत...
प्राचीर है, प्रचंड है, माँ सृष्टि का आधार है /
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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चैत नवरात्रि, शुक्लपक्ष में शुरू होता है, प्रायः यह वसंत ऋतु में आता है , जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल के महीनों में मनाया जाता है। इस वर्ष माँ दुर्गा 22 मार्च, 2023 को हम सबके घर आ रही हैं। वस्तुतः यह नौ दिन का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है । जोकि लोगों को एकता और सद्भाव की भावना में एक साथ बाँधता है। जिससे ईर्ष्या, द्वेष भाव को मिटा के अच्छाई के प्रतीक के साथ जीने की एक नयी शुरुआत होती है । यह नौ दिन पूर्णरूप से देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है। कुछ भक्त उपवास करते हैं और देवी दुर्गा से प्रार्थना करते हैं, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। मां दुर्गा के पहले दिन को मां शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है और इसी दिन नवरात्रि की शुरुआत होती है। शैलपुत्री पर्वत राजा हिमावत की पुत्री हैं, और हिंदू मां देवी महादेवी की एक अभिव्यक्ति और रूप है जो देवी पार्वती के शुद्ध रूप के रूप में खुद का प्रतिनिधित्व करती हैं।