जीवन एक संघर्ष

 

 


थका थका सा क्यूँ  है  मन अब जीवन के संघर्षों  से

हताशा दिखती चेहरे पे क्यूँ आश नहीं  है जीने की  

अंधकार के साये से क्यूँ पल पल  डरता है मन

 आश छोड़ दी जीने की क्यूँ रास नहीं आता कोई

आश लगे न जीने की जब ध्यान लगा लेना  नभ पे  

कैसे नभ मे उड़ते पंछी मन को हर्षाते हैं 

नहीं है मानव जीव है लेकिन बहुत हमें  सिखला जाते 

मूक  हैं कोई शोर न करते  प्रतिक्रिया बहुत कुछ कह जाती

 
नन्हें - नन्हें पंखों से कैसे  हवा में उड़ते जाते 

दिन भर दानों की खोज में रहते कभी नहीं घबराते हैं

 
कभी जो मौसम सख्त हुआ या गरम हवा का झोका हो 


तो पेड़ की छइयाँ  मे रुककर क्या धैर्य दिखाते हैं 


तिनके मुँह में चुन चुन कर एक गुजर बसर बनाते हैं 


 कभी कड़कती बिजली से या कभी कडक इंसानों से


अक्सर  उनके अरमानों के घोसले टूट जाते हैं,

 
रोज़ की असफलता और जीवन की कुरूर सत्यताओं से


नहीं कभी  डगमगाते हैं, न ही कभी हतासे हैं

 
कभी नहीं  देखा है उनको की पेड़ों से टंग के मर जाते हैं

 
  चिंताओं से घबराकर, न लोग क्या कहेगे इस डर से 


समझ ले प्राणी छोटी चिड़िया क्या कह  कर उड़ जाती है


सब को जाना है जब एक दिन ,फिर तुझे क्यों इतनी जल्दी है


देख मुझे मैं  कितनी नन्ही  कभी नहीं  घबराती हूँ 


तू सब के बीच मे रहकर भी  क्यूँ तन्हा -तन्हा  रहती है


 देख  मुझे मैं  कितनी तन्हा नभ में उड़ती फिरती हूँ


काले बादल डराते मुझको,सर्द  हवा थर्रा देती


तेज़ कड़कती बिजली से मैं सहम-सहम सी जाती हूँ


ना  पक्का ठिकाना कोई ना ही रोजी पक्की  है


फिर भी पूरा जीती जीवन , ये नभ ही मेरा जीवन है

 
छोड़ के सारी दुनिया दारी ,इस नभ में मगन उड़ जाती हूं


तू भी  पंख फैला  हौसलों के ,फिर मज़ा क्या जीवन जीने मे 


 क्यूँ थका थका सा  तेरा मेरा मन अब जीवन के संघर्षों से


अब देख इस नन्ही चिड़या का होसला ठान लो जीवन जीना है

अब अत्महत्या  नहीं होसलो से जीना है /

 

 

 

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