प्राचीर है, प्रचंड है, माँ सृष्टि का आधार है /

  


जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चैत नवरात्रि, शुक्लपक्ष में शुरू होता है, प्रायः यह वसंत ऋतु में आता है , जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल के महीनों में मनाया जाता है। इस वर्ष माँ दुर्गा 22 मार्च, 2023 को हम सबके घर आ रही हैं। वस्तुतः यह नौ दिन का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है । जोकि लोगों को एकता और सद्भाव की भावना में एक साथ बाँधता है। जिससे ईर्ष्या, द्वेष भाव को मिटा के अच्छाई के प्रतीक के साथ जीने की एक नयी शुरुआत होती है । यह नौ दिन पूर्णरूप से देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है। कुछ भक्त उपवास करते हैं और देवी दुर्गा से प्रार्थना करते हैं, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। मां दुर्गा के पहले दिन को मां शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है और इसी दिन नवरात्रि की शुरुआत होती है। शैलपुत्री पर्वत राजा हिमावत की पुत्री हैं, और हिंदू मां देवी महादेवी की एक अभिव्यक्ति और रूप है जो देवी पार्वती के शुद्ध रूप के रूप में खुद का प्रतिनिधित्व करती हैं।
 
यह बात भी हम सब भली भाँति जानते हैं कि जिस अच्छे भाव से हम इस नौ दिन मे रहने के लिए  वचनवद्द अपने आप को करते हैं उसी रूप मे  हर दिन क्यूँ न रहा जाए/ क्यूंकी हर बेटी मे माँ दुर्गा समाहित  होती है जो भक्त आज से माँ दुर्गा का ध्यान रखेंगे वही सोच हर बेटी के लिए नित होनी चाहिए / अपनी आँखों को बंद करके कल्पना कीजिये कि हर घर मे  एक बेटी, किसी की बहन, किसी की पत्नी तथा किसी की प्रेमिका और माँ के रूप मे होगी / लेकिन हर बेटी हर रूप मे किसी न किसी कारणवश आबरू के हनन का शिकार होती है /माँ दुर्गा कभी नहीं चाहती कि कोई उनके स्वरूप को हानि पहुंचाए/ जिस दिन हर मानव के मन में बेटी के लिए ऐसी सोच की भावना का निर्माण होगा/ उस दिन एक विकसित समाज का निर्माण होगा / तो आओ इस नवरात्रि हम सब एक संकल्प लेते हैं किसी बेटी की पीड़ा का आधार न बनने की /
क्योंकि -

माँ दुर्गा 
प्राचीर है, प्रचंड है, 
माँ  सृष्टि का आधार है 
त्रिशूल हाथ मे लिए असंख्य शक्ति से भरी 
प्रज्वालमान ज्योति का आगमन हो चुका है,
माँ  शक्ति का स्वरूप हैं, माँ  पूज्य वंदनीय है,
उमंग है, तरंग है माँ ज्वाला -सी प्रचंड हैं 
विभिन्न रूप का होके भी माँ  तो अखंड है 
करुणा है,  ममता है असहारे  कि आशा है
माँ हर्ष है, उत्कर्ष है 
हर बेटी का आदर्श है 
था इंतजार  जिसका अब आगमन हो चुका है
हर मन है व्याकुल निहारता  जो बाट है  
प्रसन्नता है, तेज है मिलन कि एक आशा है 
मन सोचता है माँ आएगी तो देखें या उसमें ही खो जाएँ 
पुछेंगे हम माँ, क्या तेरी गोद मे सो जाएँ और खो जाएँ 
माँ की प्रज्वलन आंखो में वेदना देख 
आँखे भर  गयी मेरी 
पलक झपकाए न बने आसुओं की  बारिशें हो रही और
मैं सोचती  सी रह गयी  जब एक  आहट सी महसूस हुई
पता चला वो माँ ही थी मिलन जो था  वो हो चुका है
उसी  ही अश्रू  भाव में तो माँ का प्यार था छुपा


 

 

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