एहसास का टुकड़ा

आंखो मे उसकी एक पुराना कहर देखा

दर्द मे लिपटे मंजर का  टूटा एहसास

दिखे तो बस आंसू, जख्म ही नहीं दिखे

वो अवसाद की बीमारी  से लड़ती रही

जब हादसों ने उसको उखाड़ दिया था

दूसरों की व्याख्या से जीकर देखा

 तो एहसास ही मरने लगा था

औरों को उसमे भी वहम नज़र आया

एहसास तरह तरह का होने लगा था

ख्याल जब अपनों पर जा टिका

फिर एक नया एहसास जुड़ गया

पता चल कि

वो तो अब दवाइयों पर जी रही थी

जिसने दर्द का एहसास  छीन लिया

दर्द भरा एहसास उसको अपने गर्भ तक ले गया

उसको तो सब रिश्ते चाहिए थे, पर

किसी को वो नहीं चाहिए थी

आलीशान बंगला भी उसको समेट पाया

 दर्द भरे एहसासों ने उसे  खंडहर बना डाला

वह वृद्ध आश्रम मे नया एहसास ढूँढने लगी

कंवख्त जिंदगी से हारे कुछ लोग

उसकी धंधली सोच मे भटकने लगे थे

मगर घात लगाने जाते थे

झूठी कल्पनाओं से बुनी हुई कहानी

सुनती रही वो अपनी  ही जुबानी

कोई अपना, साथी संबंधी

अब जिंदा रखने के लिए

फर्जी रिश्ते जो जुडने लगे

जिंदगी और भी दर्दनाक हो गयी

चुप्पी साधकर, एहसास ने फिर रुलाया

वो किसी को समझी , उसे कोई समझा

एहसास होते ही, वह कभी बोली ही नहीं

मुझे भी बेजुबान कर गयी

कभी- कभी वह मेरे एहसास मे जग जाती है

तब बड़ी तकलीफ होती है

उसकी मुस्कुराहट का हिस्सा कुछ मे बशा है                                             

बस उसकी साँसे ही बटोरी नहीं गयी

वरना वह अब भी मेरे जहन से बाहर जाती

माँ को फिर जीने कि कोशिस मे लगी हूँ

मन करता है उसको मनाकर

घर ले आऊँ, फिर उसे अपने एहसास मे भर लूँ

मेरे जहन ने कभी धोका नहीं दिया

उसे एहसास मे जिंदा रखा , भले ही वह मुझसे दूर रही

पर माँ  ने अपना एहसास मेरे अंदर मरने नहीं दिया

सोचा मै टूट जाऊँगी, पर उसने मुझे ऐसा करने नहीं दिया

माँ का कोई हिस्सा मुझमे ताकत डाल ही देता है

 


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