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जीवन एक संघर्ष

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    थका थका सा क्यूँ   है     मन अब जीवन के संघर्षों    से हताशा दिखती चेहरे पे क्यूँ आश नहीं    है जीने की    अंधकार के साये से क्यूँ पल पल    डरता है मन   आश छोड़ दी जीने की  क्यूँ  रास नहीं आता कोई आश लगे न जीने की जब ध्यान लगा लेना   नभ पे    कैसे नभ मे उड़ते पंछी मन को हर्षाते हैं   नहीं है मानव जीव है लेकिन   बहुत हमें   सिखला जाते   मूक   हैं कोई शोर न करते   प्रतिक्रिया बहुत कुछ कह जाती   नन्हें - नन्हें पंखों से कैसे    हवा में उड़ते जाते   दिन भर दानों की खोज में रहते कभी नहीं घबराते हैं   कभी जो मौसम सख्त हुआ या गरम हवा का झोका हो   तो पेड़ की छइयाँ   मे रुककर क्या धैर्य दिखाते हैं   तिनके मुँह में चुन चुन कर एक गुजर बसर बनाते हैं     कभी कड़कती बिजली से या कभी कडक इंसानों से अक्सर  उनके अरमानों के घोसले टूट जाते हैं ,   रोज़ की असफलता और   जीवन की कुरूर सत्यत...

एक खूबसूरत एहसास

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प्राचीर है, प्रचंड है, माँ सृष्टि का आधार है /

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   जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चैत नवरात्रि, शुक्लपक्ष में शुरू होता है, प्रायः यह वसंत ऋतु में आता है , जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल के महीनों में मनाया जाता है। इस वर्ष माँ दुर्गा 22 मार्च, 2023 को हम सबके घर आ रही हैं। वस्तुतः यह नौ दिन का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है । जोकि लोगों को एकता और सद्भाव की भावना में एक साथ बाँधता है। जिससे ईर्ष्या, द्वेष भाव को मिटा के अच्छाई के प्रतीक के साथ जीने की एक नयी शुरुआत होती है । यह नौ दिन पूर्णरूप से देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है। कुछ भक्त उपवास करते हैं और देवी दुर्गा से प्रार्थना करते हैं, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। मां दुर्गा के पहले दिन को मां शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है और इसी दिन नवरात्रि की शुरुआत होती है। शैलपुत्री पर्वत राजा हिमावत की पुत्री हैं, और हिंदू मां देवी महादेवी की एक अभिव्यक्ति और रूप है जो देवी पार्वती के शुद्ध रूप के रूप में खुद का प्रतिनिधित्व करती हैं।  

लोग पूछते हैं कि कब आएगी होली

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                                                      लोग पूछते  हैं कि  कब आएगी होली मिठास में घुल जाएगी जब कड़वी बोली रंग बरसाती तब आएगी होली अनेकों  रंगों  से रंगी ये दुनिया  लेकर  जब निकलेगी भावनाओं से भरी टोली रंग बरसाती तब आएगी होली बिगड़े हुए रिश्तों मे   हर कोई प्यार का रंग भरेगा बुझी  हुई महफिल में हर कोई रौनक  करेगा गले न मिले कोई बेसक, लेकिन  दुआ  जरूर करेगा बेगाना भी जिस रोज़  बन जाएगा हमजोली रंग बरसाती तब आएगी होली मीठे फूलों  का रस  चखकर  जब मधुमक्खीयाँ  खोलेंगी अपनी आँखें  गुझिया  के मिठास  से जब  हर कोई  झूमेगा गुलाल की  खुशबू  से  सबका दामन महकेगा रंग बरसाती तब आएगी होली  ईश्वर  का  दिया तोहफा है ये ज़िंदगी अच्छी सोच के साथ आगे बढ़ते जाओ जनाब मानो तो हर पल है होली भाईचारे के रंगों में डूब जाओगे जब खुद ह...

*क्यूंकि मै नारी हूँ*

                                          क्यूंकि मै नारी हूँ   इसलिए , बेचारी हूँ  क्या हुआ अगर  मैं थोड़ा-सा अलग हूँ  थोड़ा-सा बाहर घूम लेती हूँ जी लेती हूँ अपने  हिस्से की ज़िंदगी   खिलखिलाती हूँ अपने सपनों की दुनिया में क्यूँ यह सब बुरा लगता है दुनिया को? क्यूंकि मै नारी हूँ / समाज के बनाए हुए बंधनों के घेरे में घिरकर - "लड़की हो मत करो नादानियाँ  थोड़ा सिमटी,सहमी-सी रहो" लोग क्या कहेंगे,  "लड़की बिगड़ गयी है,   मत करो कोशिश, लड़का बनने की" क्यूंकि तुम नारी हो  मुझे पता है कुछ शर्तें हैं यहाँ   अपनी बेजुबान, छटपटाती ज़िंदगी  जीने के लिए बंधन को तोड़ने की कीमत चुकानी पड़ती है जीने के लिए लेकिन क्या  दुनिया को  पता है  उसका दायरा कहाँ सिमटता है पीड़ा मन की जब बढ़ती है भीतर का दायरा घटता है हर दायरे की सीमा भी तो नहीं होती  हर किसी के दायरे में झाँकना  एक नारी को और अके...

हमें ग़मों में खुस रहना नहीं आता

 हमें ग़मों में खुस रहना भी तो नहीं आता  आंखों में आंसू  छिपाना भी तो नहीं आता कैसे रह  पाएंगे इस मतलबी दुनियां में हमें तो झूठ को सच बताना भी  नहीं आता हमारे  ग़मों को  सब  मेरे चेहरे से बता देते हैं  क्यूंकि हमें चेहरे पे चेहरा लगाना भी तो नहीं आता सभी पूछते रहते हैं हमारी उदासी का मतलब  क्या करें हमें सच छिपाना भी तो नहीं आता हम सबके फ़िक्र की दुआ करते रहते हैं  हमें तो  किसी के गम की वजह भी  बनना नहीं आता  गम  किसने कितना दिया मुझे  ये  पता नहीं हमे   ये याद रखना भी तो नहीं आता  शायद  इसलिए  याद करते हैं सभी को इस भीड़ भरी दुनिया में  बस कितना किसको याद करते हैं ये  जताना नहीं आता                                                                                ...

अक्सर लोग पूछते हैं की कब है होली /

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  अक्सर लोग पूछते   हैं कि   होली कब है होली है अनेकों   रंगों   का त्योहार यहाँ   पल पल रंग बदलती है ये दुनिया फिर भी लोग पूछते हैं की होली कब है बिगड़े हुए रिश्तों मे   प्यार का रंग भर देना बुझी   हुई महफिल मे आगाज   ला   देना गले मिलना   न   सही दूर से ही दुआ कर देना   अब मत पूछो की होली कब है जैसे   मीठे फूलों   के रश  का आनंद लेती है मधुमक्की वैसे   गुझिया   के मिठास   को चख    लेना जरा गुलाल की   खुशबू    से   सबके दमन मे खुशियाँ  भर देना हर पल ईश्वर   का दिया तोफा है जनाब मानो तो हर पल है होली फिर भी अक्सर लोग पूछते हैं कि   कब है होली /                                                                             ...