क्या होती हैं बेटियाँ फूलों सी नाज़ुक कली होती हैं बेटियाँ माँ दुर्गा का रूप होती हैं बेटियाँ खामोश रहकर भी बहुत कुछ एहसास करा जाती हैं बेटियाँ, उपर उड़ना चाहती हैं बेटियाँ सपने तो देखती हैं पर उन सपनों को उड़ान देने वाला कोई नही होता क्यों सब की उँगलियाँ उठने को तैयार हो जाती हैं जब घर से बाहर निकलती हैं बेटियाँ , क्यों सब कुल का दीपक मानते हैं बेटों को , मिटा दो बेटे और बेटियोँ के बीच का अंतर क्यूंकि मानवता भी रोती है ऐसे अत्याचार पे जब भय से सिमट जाती हैं बेटियाँ एक समय आता है जब पराई हो जाती बेटियाँ , सब कुछ सूना लगने लगता जब रुला जाती हैं बेटियाँ , तब माँ को होती अजीब सी तकलीफ़ जब छोड़ जाती बेटियाँ , कभी माँ होती है बेटी किसी के घर की पहचान बन जाती है ये मै नही कहती ख...
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
*धुँधले रिश्ते* फासले रिश्तों मे कितनी दूरियाँ बना देते हैं मैंने राहों में दिये जलाए वो आधिंयाँ चला देते हैं फिर भी अपनों से हमने मिलना छोड़ा नहीं है अकेलापन महसूस करती हूँ कभी ज़रा- ज़रा सा अपनेपन का धोखा खाती हूँ कभी खरा-खरा सा फिर भी अपनों से हमने मुँह मोड़ा नहीं है दर्द किस ने कितना दिया है ये तो सबको याद होगा मुझे ग़म में डूबा कर उनको कुछ तो एहसास होगा फिर भी अपनों से हमने रिश्ता तोड़ा नहीं है याद तो करती हूँ सभी को पर कितना पता नहीं है मुझे अपनों ने ही ठुकराया इसमें मेरी खता नहीं है फिर भी गैंरो से हमने रिश्ता जोड़ा नहीं है़ कीर्ति पाण्डेय
- Get link
- X
- Other Apps
उदास जिंदगी हर पल कोई आसपास है फिर भी मन घटने लगता है क्यों कभी-कभी, जिंदगी उदास-सी हो जाती है? सब कुछ अंदर ही अंदर चुपचाप सिमटने लगता है क्यों कभी-कभी, रूह बेजान-सी हो जाती है तनहाई में खुशी मिलती नहीं ग़म का इजहार होता नहीं क्यों कभी-कभी, जुबां बेजुबान हो जाती है बाँट कर एक-एक खुशी हर जगह को महकाया मैंने क्यों कभी-कभी, जिंदगी सुनसान हो जाती है हौंसले बड़े हो भी गए तो क्या मुश्किलें छोटी होती नहीं क्यों कभी-कभी, जिंदगी इम्तहान हो जाती है कीर्ति पाण्डेय
- Get link
- X
- Other Apps
Understanding Human Emotions By Kirti Pandey email- humanemotions67@gmail.com Blog address- kirtipandey99article.blogspot.com How often you’ve felt that you’re stuck in the middle with an emotional barrier…..you’re in some kind of ‘hung situation’…how do you wriggle out of it? Emotions get a boil due to our multiple relationships. We face similar and dissimilar situations in life and draw different experiences. Situations keep changing for us when we’re tied up with our own parents, brothers, sisters, friends, relatives, colleagues at workplace etc. We differ in opinions, views and ideas, which trigger our emotions and when we’re dealing with it, we draw experiences. These emotional experiences become personally significant and the reactionary response is different for every individual. If we deeply analyze these emotional experiences, they conne...