15 नवम्बर ‘2023 कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि भाई दूज
आज सुबह आँख थोड़ा जल्दी खुल गयी तो मैंने सोचा जरा पौधों को सँवार दूँ / अचानक मेरी नज़र बालकनी की तरफ गयी तो देखा कि धुंधली सी अंधेरी सुबह मे चमकती हुई फूल और नारियल से सजी हुई थाल लाल टीके लगे हुए भाई बहनों की हँसती खिलखिलाता हुई टोली दिखी मन अस्तब्ध रह गया / यह देख के और मन मे कुछ जानने की जिज्ञासा हुई /
फिर क्या -लगा दिया मैंने फोन लखनऊ बड़ी बहन को मैंने सोचा जानूँ जरा - उनके तजुर्बे मे क्या है आज का दिन / अब लोग घर मे उनको तजुर्बे का गुरु जो मानते थे / कुछ जानकारी उनसे ज्ञात हुई जो बड़ी ही अद्भुद और रोमांचक लगी मुझे / फिर क्या – धूल से लपटी हुई कुछ पुरानी पौराणिक कथाओं का पिटारा खोला और जो इतिहाश जाना सोचा आप सबके साथ भी साझा कर दूँ कि - आज का दिन यानि दिवाली के ठीक तीसरा दिन और गोवर्धन पूजा के दूसरा दिन हिन्दू पौराणिक कथाओं और लोककथाओं से जुड़ा हुआ है, जिसके साथ विभिन्न पौराणिक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं और जिसके कारण आज का दिन भाई-बहन के संबंध को मजबूत करने का दिन है। यह दिन भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और सराहना का एक अद्वितीय त्योहार है। जिसे भाई दूज के नाम से जाना जाता है /
पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य भगवान की पत्नी थीं संज्ञा। जिनके दो बच्चे थे यमराज और यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से बेहद प्यार करती थी। यमुना बार बार अपने भाई यमराज से इस बात का निवेदन करती थी कि वह उनके घर आकर भोजन करें। लेकिन अपने काम में व्यस्त होने की वजह से यमराज कभी भी यमुना के घर नहीं जा पाते थे, लेकिन एक दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमुना ने एक बार फिर यमराज को घर पर आने का आमंत्रण दिया। इस बार यमराज ने अपनी बहन को कहा कि मैं अवश्य घर आऊंगा ।
बहन के घर जाते समय यमराज ने नर्क में रहने वाले जीवो को मुक्त कर दिया। यमराज जब अपनी बहन के घर पहुंचे तो यमुना बेहद खुश हुईं। उन्होंने अपने भाई का पूजन किया और उसके बाद उन्हें तरह-तरह के व्यंजन खिलाएं। लाल टीका लगाया / अपनी बहन की आवभगत से यमराज बेहद खुश हुए और उन्होंने यमुना से वर मांगने को कहा। तब यमुना ने कहा, भाई आप इस दिन हर साल मेरे घर आना और मेरी तरह जो भी बहन अपने भाई का इस दिन आदर सत्कार करके उसका टीका करेगी और उसे अपने हाथ से बना भोजन कराएगी तो उसके भाई को कभी भी तुम्हारा भय नहीं रहेगा। तब यमराज ने तथास्तु कहकर अपनी बहन से विदा ली। माना जाता है तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा की शुरुआत हो गई।
दूसरी लोकप्रिय कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा के बीच का रिश्ता है। कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को मारने के बाद अपनी बहन सुभद्रा को मिलने के लिए आए थे। सुभद्रा ने अपने भाई कृष्ण का स्वागत आरती और तिलक के साथ किया, और इस से यह परंपरा उत्पन्न हुई है/
लक्ष्मी और भगवान बलराम की कथा- इस कथा के अनुसार, भगवान बालराम ने अपनी बहन लक्ष्मी की सुरक्षा के लिए भूमि पर आए थे। लक्ष्मी ने अपने भाई का स्वागत करते हुए उसके लिए विशेष रूप से भोजन बनाया और उसे तिलक लगाया।
इन
पौराणिक कथाओं
के माध्यम से
ही भाई दूज
का त्योहार प्रारंभ
हुआ था, जो
भाई-बहन
के प्रेम और
समर्पण को
समर्थन करता
है। यह
त्योहार एक
जरिया है
कि बहन-भाई
के बीच का
यह विशेष रिश्ता
कितना महत्वपूर्ण
है और हमें इसे
सजीव रखना
चाहिए।
हैपी भाई दूज “”””
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