क्या होती हैं बेटियाँ
फूलों सी नाज़ुक कली होती हैं बेटियाँ
माँ दुर्गा का रूप होती हैं बेटियाँ
खामोश रहकर भी
बहुत कुछ एहसास
करा जाती हैं
बेटियाँ,
उपर उड़ना चाहती हैं बेटियाँ सपने तो देखती हैं
पर उन सपनों को उड़ान देने वाला कोई नही होता
क्यों सब की उँगलियाँ उठने को तैयार हो जाती हैं
जब घर
से बाहर निकलती हैं बेटियाँ ,
क्यों सब कुल का दीपक मानते हैं बेटों को,
मिटा दो बेटे और बेटियोँ के बीच का अंतर
क्यूंकि मानवता भी रोती है ऐसे अत्याचार पे
जब भय से सिमट जाती
हैं बेटियाँ
एक समय आता है जब पराई हो जाती बेटियाँ,
सब कुछ सूना लगने लगता जब रुला जाती हैं बेटियाँ,
तब माँ को होती अजीब सी तकलीफ़ जब छोड़ जाती बेटियाँ,
कभी माँ
होती है
बेटी किसी के घर
की पहचान
बन जाती
है
ये मै नही कहती खुदा कहता जिस घर मे होती हैं बेटियाँ,
उस घर
का अस्तित्व
ही कुछ
और होता
है,
क्यूंकि, बेटियाँ ही इस समाज को परिभासित करती हैं
यह महसूस किया मैने इस भीड़ भरी दुनिया मे
क्यूंकि , मै भी एक बेटी हूँ,
(KIRTI PANDEY)
Comments
Anter soch ka hota hai,parvarish ka hota hai jo
Parwan latey hai ye Bete aur Betia